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दूध पिलाने के लगà¤à¤— दस मिनट बाद शिशॠको गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वॉटर देना सही रहता है।
कà¥à¤¯à¤¾ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठगà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ है?
यह सवाल अकà¥à¤¸à¤° कई लोगों के मन में चलता होगा कि कà¥à¤¯à¤¾ उनके ननà¥à¤¹à¥‡ के लिठगà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ है? हालांकि, यह साबित करने के लिठकोई वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤• पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£ नहीं है कि गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर बचà¥à¤šà¥‡ के लिठसà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ है या नहीं, लेकिन पहले गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर में अलà¥à¤•ोहल को मिलाया जाता था, जिस कारण यह शिशॠके लिठहानिकारक था। इसके अलावा à¤à¥€ कई à¤à¤¸à¥‡ ततà¥à¤µ हैं, जिनका धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखना जरूरी है। इसलिà¤, नीचे हम कà¥à¤› चीजों के बारे में बता रहे हैं, जो अगर गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर में हों, तो यह शिशॠके लिठहानिकारक हो सकता है।
अलà¥à¤•ोहल – पहले गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वॉटर में सीमित मातà¥à¤°à¤¾ में अलà¥à¤•ोहल को मिलाया जाता था (2)। à¤à¤¸à¤¾ माना जाता था कि गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर में अलà¥à¤•ोहल की मातà¥à¤°à¤¾ बचà¥à¤šà¥‡ पर अचà¥à¤›à¤¾ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ डालती है, जबकि à¤à¤¸à¤¾ नहीं है। वहीं, अब बाजार में मिल रहे गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर में अलà¥à¤•ोहल का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² नहीं किया जाता है।
सोडियम बाइकारà¥à¤¬à¥‹à¤¨à¥‡à¤Ÿ (Sodium bicarbonate) – गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर में सोडियम बाइकारà¥à¤¬à¥‹à¤¨à¥‡à¤Ÿ का à¤à¥€ उपयोग होता है। इसके जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ सेवन से शिशॠको अलà¥à¤•ालोसिस और मिलà¥à¤• अलà¥à¤•ली सिंडà¥à¤°à¥‹à¤® जैसी समसà¥à¤¯à¤¾ हो सकती है, जिस कारण शिशॠके किडनी व अनà¥à¤¯ अंगों पर असर पड़ सकता है (2)। अलà¥à¤•ालोसिस शरीर में कà¥à¤› असामानà¥à¤¯ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ के कारण होता है, जिससे खून में पीà¤à¤š का सà¥à¤¤à¤° असंतà¥à¤²à¤¿à¤¤ हो जाता है। दरअसल, खून à¤à¤¸à¤¿à¤¡ और बेस से बना होता है और शरीर में à¤à¤¸à¤¿à¤¡ कम होता है या बेस बॠजाता है, तो à¤à¤¸à¤¾ हो सकता है। वहीं, मिलà¥à¤• अलà¥à¤•ली सिंडà¥à¤°à¥‹à¤® की अवसà¥à¤¥à¤¾ में शरीर में कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® की मातà¥à¤°à¤¾ अधिक हो जाती है।
शà¥à¤—र – गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर में à¤à¤¾à¤°à¥€ मातà¥à¤°à¤¾ में शà¥à¤—र होती है। à¤à¤¸à¥‡ में अगर इसे शिशॠको जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ मातà¥à¤°à¤¾ में पिलाया जाà¤, तो शिशॠके नà¤-नठदांत खराब हो सकते हैं। इसलिà¤, जब à¤à¥€ गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर खरीदने जाà¤à¤‚, तो उसमें शà¥à¤—र की मातà¥à¤°à¤¾ जरूर चेक कर लें और शिशॠको संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ में इसका सेवन कराà¤à¤‚ ।
गà¥à¤²à¥‚टेन – कई बार गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर में गà¥à¤²à¥‚टेन à¤à¥€ रहता है, जो शिशॠके लिठहानिकारक हो सकता है। शिशॠको कम से कम छह महीने के बाद ही गà¥à¤²à¥‚टेन का सेवन कराना चाहिà¤à¥¤ अगर उससे पहले शिशॠको यह दिया जाà¤, तो उसे सीलिà¤à¤• डिजीज (à¤à¤• तरह की आंत संबंधी बीमारी) होने का खतरा बढ़ जाता है ।
वेजिटेबल कारà¥à¤¬à¤¨ या चारकोल – कई गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर में वेजिटेबल कारà¥à¤¬à¤¨ या चारकोल का उपयोग à¤à¥€ किया जाता है, जो शिशॠके लिठहानिकारक हो सकता है। इसलिà¤, शिशॠके लिठगà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर लेने से पहले उसमें मिलाई गई सामगà¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ पर जरूर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ दें। अगर उसमें चारकोल मौजूद हो, तो उसे अपने शिशॠको न पिलाà¤à¤‚। इसका सेवन à¤à¤• सही उमà¥à¤° में और डॉकà¥à¤Ÿà¤° की देखरेख में संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ में ही करना चाहिठ।
इन सबके अलावा गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर में कà¥à¤› जड़ी-बूटियां à¤à¥€ होती हैं, जिसका साइड इफेकà¥à¤Ÿ शिशॠपर हो सकता है। खासकर, इसका पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ शिशॠकी अविकसित किडनी पर अधिक पड़ता है। इसलिà¤, शिशॠको गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर डॉकà¥à¤Ÿà¤° की सलाह पर ही देना चाहिà¤à¥¤
गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर के फायदे कà¥à¤¯à¤¾ हैं? |
अगर गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर का संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ और सही तरीके से उपयोग किया जाà¤, तो यह शिशॠके लिठफायदेमंद à¤à¥€ हो सकता है। अगर नहीं होता यकीन, तो नीचे पà¥à¤¿à¤ कि गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर के फायदे कà¥à¤¯à¤¾-कà¥à¤¯à¤¾ हैं।
कॉलिक यानी पेट दरà¥à¤¦ – कई बार शिशॠको गैस की वजह से पेट में दरà¥à¤¦ या मरोड़ की समसà¥à¤¯à¤¾ होती है। इस कारण शिशॠलंबे वकà¥à¤¤ तक रोता रहता है, à¤à¤¸à¥‡ में गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर के सेवन से शिशॠको दरà¥à¤¦ की परेशानी से राहत मिल सकती है। धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रहे कि डॉकà¥à¤Ÿà¤° से पूछने के बाद ही शिशॠको पिलाà¤à¤‚ ।
पेट संबंधी अनà¥à¤¯ समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ – कई बार शिशà¥à¤“ं को à¤à¥€ गैस और पेट संबंधी अनà¥à¤¯ समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ जैसे – कबà¥à¤œ की परेशानी होती है। à¤à¤¸à¥‡ में आप शिशॠको गैस और पेट फूलने की समसà¥à¤¯à¤¾ के दौरान à¤à¥€ गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर दे सकते हैं।
दांत निकलते वकà¥à¤¤ – दांत निकलते वकà¥à¤¤ à¤à¥€ शिशॠबहà¥à¤¤ चिड़चिड़े हो जाते हैं और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अनà¥à¤¯ सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ संबंधी परेशानियां होने लगती है। à¤à¤¸à¥‡ में कई बार माता-पिता गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर का उपयोग करते हैं। धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रहे कि इसका जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ उपयोग न करें, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इससे शिशॠके नठदांत खराब हो सकते हैं
नोट : गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर खरीदने से पहले उसमें मौजूद सामगà¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के बारे में जरूर पॠलें और डॉकà¥à¤Ÿà¤° के कहने पर ही शिशॠको यह पिलाà¤à¤‚।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर कब देना चाहिठ? |
वैसे तो जब शिशॠचिड़चिड़ा हो रहा हो, लगातार रो रहा हो, पेट में गैस की तकलीफ हो रही हो, तब उसे गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर दे सकते हैं। साथ ही धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रहे कि आपका शिशॠà¤à¤• महीने से कम का न हो। à¤à¤• महीने से छोटे शिशॠके लिठगà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर देना सही नहीं है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इस दौरान शिशॠका पाचन तंतà¥à¤° संवेदनशील और कमजोर होता है, जिस कारण उसे समसà¥à¤¯à¤¾ हो सकती है। बेहतर यही है कि अपने डॉकà¥à¤Ÿà¤° से परामरà¥à¤¶ जरूर कर लें। डॉकà¥à¤Ÿà¤° आपके शिशॠकी परेशानी को समà¤à¤•र सही राय देंगे।
आगे जानिठबेबी को गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर कैसे दिया जाना चाहिà¤à¥¤
शिशà¥à¤“ं के लिठगà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर कैसे दें?
आप à¤à¤• चमà¥à¤®à¤š में या डà¥à¤°à¥‰à¤ªà¤° की मदद से गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर दे सकते हैं। बाजार में कई बà¥à¤°à¤¾à¤‚डेड गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर उपलबà¥à¤§ हैं, जिनके डिबà¥à¤¬à¥‡ या बोतल पर लिखा होता है कि बचà¥à¤šà¥‡ को कितनी मातà¥à¤°à¤¾ में गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर देना चाहिà¤à¥¤ à¤à¤• चमà¥à¤®à¤š का उपयोग करके मातà¥à¤°à¤¾ को मापें और फिर इसे अपने बचà¥à¤šà¥‡ को देने के लिठडà¥à¤°à¥‰à¤ªà¤° का उपयोग करें। गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर आमतौर पर मिनटों के à¤à¥€à¤¤à¤° पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ दिखाता है, लेकिन यह कई कारकों पर निरà¥à¤à¤° करता है, जैसे कि शिशॠकी उमà¥à¤° और उसकी सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ की गंà¤à¥€à¤°à¤¤à¤¾à¥¤
आमतौर पर गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर दिन में à¤à¤• बार दिया जाता है, लेकिन कà¤à¥€-कà¤à¥€ कà¥à¤› बà¥à¤°à¤¾à¤‚ड à¤à¤• बार से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ देने की सलाह देते हैं। à¤à¤¸à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में इस बारे में डॉकà¥à¤Ÿà¤° से सलाह लेना जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ बेहतर रहेगा।
गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर लेने से पहले उसकी à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¤¾à¤¯à¤°à¥€ डेट जरूर चेक कर लें। साथ ही उसमें मौजूद सामगà¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को à¤à¥€ पढ़ लें।
गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर के नà¥à¤•सान |
गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर के फायदे और नà¥à¤•सान दोनों हैं। अगर इसे सीमित मातà¥à¤°à¤¾ में उपयोग करें, तो फायदे और जरूरत से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करें, तो नà¥à¤•सान à¤à¥€ कई हैं। अब सवाल यह उठता है कि नà¥à¤•सान कà¥à¤¯à¤¾-कà¥à¤¯à¤¾ हो सकते हैं। आइà¤, जानते हैं:
शिशॠको à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ हो सकती है।
खà¥à¤œà¤²à¥€ की समसà¥à¤¯à¤¾ हो सकती है
गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर की तासीर ठंडी होती है, तो इससे आंखों में पानी आने की परेशानी हो सकती है।
सांस लेने की समसà¥à¤¯à¤¾ हो सकती है।
उलà¥à¤Ÿà¥€ आ सकती है।
सूजन की परेशानी à¤à¥€ हो सकती है।
अगर इसे सही तरह से सà¥à¤Ÿà¥‹à¤° या पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— न किया जाà¤, तो शिशॠको बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤² इंफेकà¥à¤¶à¤¨ à¤à¥€ हो सकता है।
गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर का उपयोग करने से पहले बरती जाने वाली सावधानियां
अगर आप चाहते हैं कि आपके शिशॠको गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर से फायदा हो, तो बेबी को गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर देने से पहले नीचे लिखी कà¥à¤› सावधानियों के बारे में जान लें।
सामगà¥à¤°à¥€ – गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर खरीदते वकà¥à¤¤ उसमें कौन से सामगà¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का उपयोग हà¥à¤† है उस बारे में पॠलें। अगर उसमें अलà¥à¤•ोहल व चारकोल जैसे ततà¥à¤µ हैं, तो उसे न खरीदें।
तारीख – हमेशा गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर खरीदते वकà¥à¤¤ उसके बनने की और कब तक उपयोग कर सकते हैं, उस तारीख को देखकर अपने शिशॠको पिलाà¤à¤‚। धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रहे कि आपके बचà¥à¤šà¥‡ की सेहत आपके हाथों में है।
मातà¥à¤°à¤¾ – शिशॠको à¤à¤• बार में कितनी मातà¥à¤°à¤¾ देनी है, इस बारे में डॉकà¥à¤Ÿà¤° से जरूर पूछ लें।
à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ – धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रहे कि अगर आपके शिशॠको à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ हो या उसे कोई दवा दे रहो हो, तो गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर न दें या फिर डॉकà¥à¤Ÿà¤° की सलाह के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° दें।
आगे जानिठगà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर के कà¥à¤¯à¤¾-कà¥à¤¯à¤¾ विकलà¥à¤ª हो सकते हैं।
गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर के विकलà¥à¤ª
गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर à¤à¤²à¥‡ ही फायदे हों, लेकिन धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रहे कि आपके शिशॠको इसकी आदत न पड़े। इसलिà¤, नीचे हम आपको गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर के विकलà¥à¤ª के बारे में बता रहे हैं।
अगर शिशॠको पेट में गैस या दरà¥à¤¦ की परेशानी हो, तो आप शिशॠके पेट को हलà¥à¤•े-हलà¥à¤•े से मालिश करके उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ आराम पहà¥à¤‚चा सकते हो।
अगर आप शिशॠको फॉरà¥à¤®à¥‚ला मिलà¥à¤• दे रहे हैं, तो उसके दूध में बदलाव करके देखें या जिस बà¥à¤°à¤¾à¤‚ड का उपयोग कर रहे हैं, उसे बदलकर देखें।
मौसम में बदलाव होने पर शिशॠपर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ दें। कà¤à¥€-कà¤à¥€ शिशॠठंड लगने से या गरà¥à¤®à¥€ लगने से à¤à¥€ रोते हैं। इसलिà¤, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ मौसम के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° ही कपड़े पहनाà¤à¤‚।
शिशॠको दूध पिलाने के बाद उसे डकार जरूर दिलाà¤à¤‚।
शिशॠको कम से कम छह महीने तक मां का दूध ही दें।
कà¥à¤¯à¤¾ गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर को फॉरà¥à¤®à¥‚ला दूध में मिलाया जा सकता है?
कई माता-पिता गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर को फॉरà¥à¤®à¥‚ला दूध के साथ देते हैं। हालांकि, यह सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ हो सकता है, लेकिन बेहतर होगा कि आप गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर को किसी चीज में मिलाकर न दें। गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर का असर तब और अचà¥à¤›à¥‡ से होता है, जब इसे à¤à¤¸à¥‡ ही बिना किसी चीज में मिलाकर दिया जाà¤à¥¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर का सà¥à¤µà¤¾à¤¦ अचà¥à¤›à¤¾ होता है, इसलिठयह आपके शिशॠको पसंद आà¤à¤—ा।
ननà¥à¤¹à¥‡ शिशॠनाजà¥à¤• होते हैं और माता-पिता की छोटी-सी अनदेखी à¤à¥€ उनके सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ पर à¤à¤¾à¤°à¥€ साबित हो सकती है। इसलिà¤, आप इस लेख में गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर के फायदे और नà¥à¤•सान जानने के बाद अपने बेबी को गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर देते वकà¥à¤¤ पहले से à¤à¥€ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ सावधानी बरतेंगे। साथ ही अगर शिशॠके सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ में जरा-सा à¤à¥€ असंतà¥à¤²à¤¨ नजर आà¤, तो तà¥à¤°à¤‚त डॉकà¥à¤Ÿà¤° से संपरà¥à¤• करें।
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